Tuesday, October 20, 2020
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इस नवरात्र में अष्टमी-नवमी पूजन एक ही दिन

एक महीने की देरी के बाद शारदीय नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू हो रहे हैं। विजयादशमी 25 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस बार 9 दिनों में ही 10 दिनों का पर्व संपन्न हो जाएगा। इसका कारण तिथियों का उतार-चढ़ाव है। 24 अक्तूबर को सुबह 6:58 बजे तक अष्टमी रहेगी और उसके बाद नवमी लग जाएगी। दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं, इसलिए अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन होगी। 25 अक्तूबर को सुबह 7:41 बजे के बाद दशमी तिथि लग जाएगी, इसी दिन दशहरा और अपराजिता पूजन होगा।

अधिक मास के कारण विवाह, सगाई, भवन निर्माण, व्यवसाय आरंभ जैसे बहुत से कार्य रुक गये थे, लेकिन नवरात्र के साथ ही इनके लिए शुभ समय शुरू हो जाएगा। यूं तो नवरात्र में बिना मुहूर्त देखे भी कई कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान कई अन्य शुभ संयोगों का तोहफा भी मिलेगा। इस बार 18 और 24 अक्तूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग है। इसके अलावा 17, 21 और 25 को अमृत योग, 19 को आयुष्मान, 20 को सौभाग्य योग बन रहे हैं।

घट स्थापना का मुहूर्त

नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना का भी विधान है। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी 17 अक्तूबर को घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:27 बजे से 10:13 बजे तक का है। अभिजित मुहूर्त 11:44 से 12:29 बजे तक रहेगा। नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां पार्वती माता शैलपुत्री का ही रूप हैं और हिमालय राज की पुत्री हैं। माता नंदी की सवारी करती हैं। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का फूल है। नवरात्र के पहले दिन लाल रंग का महत्व होता है। यह रंग साहस, शक्ति, कर्म का प्रतीक है।


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अक्तूबर में 19, 20, 21, 24, 25, 28 से 31 तक विवाह के शुभ मुहूर्त हैं।

* नवंबर में विवाह के लिए शुभ तिथियां हैं- 2, 9, 12, 17, 18, 20, 21, 22, 25, 27, 30

* दिसंबर में केवल 3 दिन ही विवाह के लिए शुभ होंगे- 7, 9 और 10

* 2021 में शुक्र व गुरु की अच्छी स्थिति न होने के कारण विवाह अप्रैल तक लंबित हो सकते हैं। हालांकि 16 फरवरी को वसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त होगा और इस दिन विवाह किया जा सकता है। साल 2021 में विवाह के अच्छे मुहूर्त 50 से भी कम होंगे।

अश्व पर आएंगी माता

इस बार शारदीय नवरात्र का आरंभ शनिवार के दिन हो रहा है। ऐसे में देवीभागवत पुराण के कहे श्लोक के अनुसार माता का वाहन अश्व होगा। माता घोड़े पर आएंगी और भैंसे पर विदा होंगी। अश्व पर माता का आगमन युद्ध, विरोध, आंधी-तूफान का संकेत माना जाता है। भैंसे पर मां का विदा होना भी शुभ नहीं माना जाता।

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