Thursday, October 29, 2020
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हिंदी फीचर फिल्म जंगली

फ्लैशबैक के पाठकों को शम्मी कपूर की मस्ती देखनी हो तो जंगली फिल्म देखें। एक तो हिंदी सिनेमा का एल्विस प्रेसले कहे जाने का गुरूर और फिर कलाकारों की फैमिली मेम्बर (कपूर खानदान) होने का फायदा, उनकी एक्टिंग में गाम्भीर्य लाने के लिए पर्याप्त है। जो वो एक छोटे से वक्फे के बाद गर्दन विभिन्न दिशाओं में थोड़ी-थोड़ी देर के लिए घुमाते हैं, उनके लटकों-झटकों में चार चांद लग जाते हैं। जब उन्होंने सायरा बानो के साथ कश्मीर की बर्फ में याहू कहकर ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ गाया तो उस वक्त की हर युवा धड़कन का सपना बन गया कि हनीमून कश्मीर में ही मनाया जाये और वैसे ही बर्फ से खेला जाये। फिर हेलन के साथ मस्त होकर डांस करते शम्मी कपूर का वो गाना कौन भूल सकता है- ‘ऐ ऐ यार करूं क्या मैं सुकू-सुकू।’ ये आज के युवक बात-बात पर कांधे बिचकाते हैं और हिलते रहते हैं, इसका रिवाज सबसे पहले शम्मी कपूर ने ही शुरू किया। यह गाना अंग्रेजी फिल्म के गाने की नकल है, लेकिन शम्मी कपूर के अभिनय ने उसे असल बनाकर पेश किया कि तब अंग्रेजी फिल्मों के दीवाने युवा गाते तो इस गीत को अंग्रेजी में, लेकिन एक्टिंग शम्मी कपूर की करते थे।

सायरा बानो की यह डेब्यू फिल्म थी जो 1961 में रिलीज हुई। इसे निर्देशित किया था सुबोध मुखर्जी ने। वही सुबोध मुखर्जी जिन्होंने मुनीम जी, शर्मीली, अभिनेत्री जैसी फिल्में निर्देशित की थी। सायरा बानो जानी-मानी अभिनेत्री नसीम बानो की बेटी थीं, जिसका फायदा यह हुआ कि उन्हें छोटी ही उम्र में फिल्मों में एंट्री मिल गयी। शक्ल-सूरत तो अच्छी थी ही, एक्टिंग नहीं आती तो क्या? सीख लेंगे। शम्मी कपूर और सुबोध मुखर्जी किसलिए हैं। उन्होंने नये अपरिपक्व पत्थर को ऐसा तराशा कि वह हीरा बन गया। मतलब शम्मी कपूर और सायरा बानो की इस फिल्म में कैमिस्ट्री देखते ही बनती है। सायरा बानो की एक्टिंग के दर्शक इतने दीवाने हुए कि उन्हें पहली ही फिल्म से फिल्म फेयर अवार्ड्स में सर्वोत्तम अभिनेत्री के लिए नामांकित कर लिया गया। यह फिल्म सुपर-डुपर हिट रही। उस जमाने में ही इसने पौने दो करोड़ का राजस्व नये-नये बने प्रोडक्शन हाउस फिल्मालय की झोली में डालकर उसे आर्थिक रूप से खड़ा कर लिया। इसके मालिक उनके भाई शशाधर मुखर्जी थे और आस का पंछी फिल्म में जो एक्ट्रेस बनी हैं वह सुबोध मुखर्जी की ही पत्नी कमला हैं। पहली शादी कमला ने अंग्रेजी फिल्मों के अभिनेता से की थी। यह फिल्म दोबारा तेलुगू में बनी थी, जिसमें शम्मी कपूर की जगह ली थी एनटी रामाराव ने। फिल्म में ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ की कोरियोग्राफी की थी पीएल राज ने। फिल्म शोले में हेलन को नचाने वाले पीएल राज ही थे। इसके अलावा उन्होंने शम्मी कपूर को तीसरी मंजिल में भी कोरियोग्राफ किया। हिंदी सिनेमा में कैबरे लाने वाले वही थे।

कहानी में जंगली शेखर (शम्मी कपूर) को कहा गया है और ऐसा कहने की हिम्मत तो उसकी माशूका राजकुमारी (सायरा बानो) ही कर सकती हैं। शेखर जैसे ही लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी करके आता है, वह अपना पुश्तैनी व्यवसाय संभालता है। उसकी मां ललिता पवार है जो कड़े अनुशासन से घर-बाहर संभालती है। परिवार में किसी को भी ऊंची आवाज में बात करने की इजाजत नहीं है। शेखर भी ऐसे ही करता है, जिससे उसकी बहन माला (शशिकला) उसकी खिल्ली उड़ाती है। वह मां के हिटलर ऑर्डर को मानने से इनकार करती है। वह जीवन (अनूप कुमार) नामक व्यक्ति से प्यार करती है जो शेखर की कंपनी में काम करता है। जब यह बात उसकी मां को पता चलती है तो लड़के का भूत माला के दिमाग से निकालने के लिए वह उसे भाई शेखर के साथ किसी दूरस्थ पहाड़ी स्थान पर भेजती है जहां उसकी मुलाकात पहाड़ी इलाके की बाला सायरा बानो से होती है। सायरा बानो का नाम राजकुमारी है और वह वहीं के ही डॉक्टर की बेटी है। वह राजकुमारी को दिल दे बैठता है और उसे प्यार करने लगता है, लेकिन मां की उन बात को याद करके कांप जाता है, जिनमें उसने कहा था कि उसे शाही परिवार से ही शादी करनी चाहिए। वह मां की बात को ही सही मानता था जब तक कि वह राजकुमारी के साथ कश्मीर की बर्फबारी में नहीं फंसता, जहां उसे जीवन का फलसफा समझ आता है कि जीवन जीने के लिए ही है, घुटने के लिए नहीं। जब वह घर लौटता है तो पूरी तरह एक बदला इनसान होता है। इसी बीच माला अनूप के बच्चे को जन्म देती है, उसकी डिलीवरी वहीं होती है जहां राजकुमारी का पिता है। वह उसके बेटे की बात सभी से छिपा लेते हैं। यहां तक कि भाई से भी। इस बीच माला और शेखर घर लौटते हैं जहां शेखर मां को राजकुमारी के बारे में बताता है। मां राजकुमारी को किसी रियासत की राजकुमारी समझ लेती है, लेकिन सच्चाई सामने आते ही वह शादी से इनकार करती है और जिस राजकुमारी से शेखर की शादी करना चाहती है वे लालची हैं और नकली रजवाड़े हैं। कुछ देर के फैमिली ड्रामे के बाद मां को सच-झूठ का पता चल जाता है और वह अंत में राजकुमारी से शादी के लिए तैयार हो जाती है। जब उसे बेटी के बारे में पता चलता है तो वह दोनों को भी अपनाने के लिए तैयार हो जाती है और जिस अनूप कुमार के लिए वह नाक भौं सिकोड़ती है, उसे वह दामाद के रूप में स्वीकार कर लेती है।

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