Saturday, October 31, 2020
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जीवन का सार

हिलेल नाम के एक यहूदी फकीर का अंत समय आ गया। वह मर रहा था। उसके सभी शिष्य उसके चारों ओर गमगीन होकर खड़े थे। तभी अचानक फकीर ने अपनी आंखें खोली और मुस्करा दिया। शिष्य हैरत में पड़ गए। एक शिष्य ने पूछा—गुरुदेव, आप मुस्करा क्यों रहे हो? फकीर ने कहा—हां, मैं मुस्करा इसलिए रहा हूं कि अब परमात्मा मेरा हिसाब-किताब लेंगे। वे यह नहीं पूछेंगे कि तुम जिंदगीभर मूसा जैसे क्यों नहीं हो सके? बल्कि वे मुझसे यह पूछेंगे कि मैंने तुम्हें हिलेल बनाकर भेजा था, तुम सारी उम्र मूसा बनने में लगे रहे, हिलेल क्यों नहीं बन सके। अब परीक्षा हिलेल की होगी। मैं तुम सबको भी यही कहता हूं कि तुम मेरा अनुसरण करके कहीं हिलेल बनने में मत जुट जाना। तुम्हें अपना व्यक्तित्व खोजना है, उसे निखारना है। यही जीवन का सार है।

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