Friday, October 30, 2020
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पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह नहीं रहे

विदेश, वित्त और रक्षा मंत्री रहे जसवंत सिंह का लंबी बीमारी के बाद रविवार को यहां निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। जोधपुर में उनके फार्म हाउस में रविवार शाम उनका अंतिम संस्कार किया गया। जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इससे पहले पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से जोधपुर लाया गया और फार्म हाउस में लोगों ने उन्हें पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। भारतीय सेना की ओर से भी पुष्प चक्र अर्पित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा व अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी और भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे जसवंत सिंह ने दिल्ली में सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में अंतिम सांस ली। सैन्य अस्पताल ने एक बयान जारी कर कहा, ‘जसवंत सिंह को 25 जून को भर्ती कराया गया था। रविवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।’ पूर्व सैन्य अधिकारी जसवंत सिंह अगस्त 2014 में अपने घर में गिरने के बाद से बीमार थे।

राष्ट्रपति कोविंद ने उन्हें उत्कृष्ट सांसद, असाधारण जननेता और बुद्धिजीवी करार देते हुए कहा, ‘जसवंत सिंह ने अनेक कठिन भूमिकाओं को सहजता और धैर्य के साथ निभाया।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जसवंत जी को राजनीति तथा समाज से संबंधित मामलों में उनके अद्वितीय दृष्टिकोण के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने भाजपा को मजबूती देने में भी योगदान दिया। मैं उनके साथ हुए संवाद को याद कर रहा हूं। अटल जी की सरकार में उन्होंने महत्वपूर्ण पदों को संभाला और गहरी छाप छोड़ी।’

वाजपेयी सरकार में निभाईं बड़ी जिम्मेदारियां

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जसवंत सिंह को जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राजस्थान के बाड़मेर से मैदान में उतरे थे। हालांकि उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। जसवंत सिंह ने दार्जीलिंग संसदीय क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया। 3 जनवरी, 1938 को बाड़मेर के जसोल गांव में जन्मे जसवंत सिंह भाजपा के उन गिने-चुने नेताओं में से थे जो आरएसएस की पृष्ठभूमि से नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने वाजपेयी सरकार में विदेश, वित्त और रक्षा मंत्री बनने का गौरव हासिल किया। वाजपेयी ने ही उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया था। वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान वह विदेश मंत्री बने। उनकी पुस्तक ‘जिन्ना-इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस’ प्रकाशित होने के 2 दिनों के बाद ही उन्हें भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। वर्ष 1999 में कंधार विमान अपहरण कांड के दौरान 3 आतंकवादियों को अपने साथ विमान से कंधार ले जाने को लेकर जसवंत सिंह की अकसर आलोचना होती रही।

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