Saturday, September 26, 2020
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11 बिल लायेगी सरकार, हंगामे के आसार

कोरोना काल में संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। केंद्र सरकार इस सत्र में लगभग 11 विधेयक ला रही है, जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल कोरोना, बदहाल अर्थव्यवस्था, लद्दाख में चीन की आक्रामकता, खेती से संबंधित अध्यादेश, एमएसएमई, व्यापार व कारोबार आदि मुद्दों पर मोदी सरकार से जवाब मांगेंगे। विपक्ष के तेवरों से साफ है कि इस सत्र के भी हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं।

कोरोना के कारण इस बार संसद सत्र के लिए अलग तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं। संसद भवन परिसर में कोरोना टेस्ट नेगेटिव होने पर ही प्रवेश मिलेगा। यह पहला मौका है जब संसद के दोनों सदनों की बैठकें मात्र 4-4 घंटे होंगी। दोनों सदनों के सदस्य सभा की कार्यवाही के दौरान दोनों सदन कक्षों का उपयोग करेंगे। सांसदों को प्रश्नों के उत्तर लिखित में दिए जाएंगे। लंबे समय बाद ऐसा हो रहा है जब सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक नहीं हुई। विपक्षी दल भारत-चीन सीमा पर तनाव से लेकर अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट और कोरोना महामारी के प्रबंधन को लेकर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस इस बार सरकार की ओर से सदन में पेश किए जाने वाले 11 विधेयकों में से 4 का विरोध करने जा रही है।

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि पार्टी ने फैसला किया है कि संसद के दोनों सदनों में कृषि-संबंधी 3 विधेयकों और बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक का विरोध किया जाएगा। कांग्रेस नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भी कहा कि कोरोना, लद्दाख प्रकरण, गिरती जीडीपी, नयी शिक्षा नीति जैसे कई मुद्दे हैं जिनके बारे में देशवासी सुनना चाहते हैं और सांसद चर्चा करना चाहते हैं।

भाजपा ने भी विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस को निशाने पर लेने की रणनीति बनाई है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले करते हैं, उससे अधिकतर विपक्षी दल सहमत नहीं हैं। ऐसे में कई मुद्दों पर विपक्ष एकजुट नहीं रह पाएगा। भाजपा ऐसे में चीन से राजीव गांधी फाउंडेशन को मिले पैसे का मुद्दा उठा सकती है।

नयी दिल्ली (एजेंसी) : द्रमुक नेता टीआर बालू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए एजेंडा पर चर्चा में विपक्षी दलों ने आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी और भारत-चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध के मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा कराने की मांग की है। सत्र शुरू होने के एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने निचले सदन की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। द्रमुक नेता ने कहा कि ओबीसी के लिए क्रीमी लेयर संशोधित करने, जीएसटी के तहत संग्रहित राजस्व का हिस्सा राज्यों को नहीं देने के मुद्दे पर भी चर्चा कराने की मांग की गयी है। बिरला ने कहा कि सभी दलों के नेताओं ने सदन का कामकाज सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

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