Sunday, September 27, 2020
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केंद्र की निर्धारित प्रक्रिया लागू करनी ही होगी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना के संदिग्ध या पुष्टि वाले मामलों को एक जगह से दूसरे स्थान पर पहुंचाने सहित इसके विभिन्न पहलुओं के बारे में केंद्र द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना राज्यों के लिये जरूरी है। शीर्ष अदालत ने गैर सरकारी संगठन ‘अर्थ’ की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मरीजों को एम्बुलेंस में लाने ले जाने का शुल्क राज्यों को निर्धारित करना चाहिए। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कोरोना वायरस से संक्रमित अथवा इससे संक्रमित होने के संदेह वाले मरीजों को ले जाने के लिये एम्बुलेंस मनमाना पैसा वसूल रही हैं। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सालिसीटर जनरल तुषार मेहता के इस कथन का संज्ञान लिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पहले ही इस बारे में अपनाये जाने वाले मानक जारी कर चुका है और सभी राज्यों को इन पर अमल करना होगा।

वीडियो काॅन्फ्रेंस के माध्यम से याचिका की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘राज्य तर्कसंगत शुल्क निर्धारित करेंगे और सभी एम्बुलेंस वाहनों को इसी दर से दिया जायेगा।’ पीठ ने इसके साथ ही इस याचिका का निस्तारण कर दिया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि कुछ राज्य केंद्र द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं और मरीज दूसरों की दया पर निर्भर हैं। उनसे एम्बुलेंस के लिये 7 हजार रुपए तक और कुछ मामलों में तो 50,000 रुपए तक वसूले गये हैं।

हरियाणा में शुक्रवार को 2694 नये केस दर्ज हुए। 24 घंटों की इस अवधि में 33 लोगों की मौत भी हुई। एक दिन में मरने वालों का यह सर्वाधिक आंकड़ा है। अभी तक 89 877 पॉजिटिव केस राज्य में मिले हैं। 24 घंटों में 1820 मरीज ठीक भी हुए। पिछले 11 दिनों में राज्य में 18625 नये मरीज मिले हैं। राज्य में अब 10 लाख लोगों पर औसतन 56473 के टेस्ट हो रहे हैं। प्रदेश में डबलिंग रेट एक और दिन घटकर अब 30 से 29 हो गया है।

भारत में एक दिन में कोरोना के 96,551 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर शुक्रवार को 45 लाख के पार चले गए, वहीं 1,209 और लोगों की मौत भी इस बीमारी से हुई। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार शुक्रवार तक 35 लाख से अधिक लोग संक्रमण मुक्त हुए हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश में कोरोना के कुल मामले बढ़कर 45,62,414 हो गए हैं, जबकि 35,42,663 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। देश में अभी 9,43,480 लोगों का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 20.68 प्रतिशत है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार देश में 10 सितंबर तक कोरोना के लिए 5,40,97,975 नमूनों की जांच की गई है, जिनमें से 11,63,542 नमूनों की जांच बृहस्पतिवार को ही की गई।

आईएसएमआर द्वारा किए गए पहले राष्ट्रीय सीरोसर्वे के अनुसार मई की शुरुआत तक करीब 64 लाख लोगों के कोरोना की चपेट में आने के संकेत मिले हैं। सर्वे 11 मई से 4 जून के बीच किया गया था। 28,000 लोगों के रक्त के नमूनों की ‘कोविड कवच एलिसा’ किट से इम्यूनोग्लोबिन-जी एंटीबॉडी की जांच की गई। इसमें सबसे अधिक 43.3 %, 18 से 45 आयुवर्ग में एंटीबॉडी पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया, ‘सर्वेक्षण के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि भारत में ‘सीरोप्रेवलेंस’ (प्रसार) समग्र रूप से कम था, मई 2020 मध्य तक एक प्रतिशत व्ायस्क आबादी ही सार्स -सीओवी-2 की चपेट में आई थी।’ ‘कम प्रसार दर्शाता है कि भारत महामारी के शुरुआती चरण में है और आबादी के अधिकतर हिस्से पर अब भी सार्स -सीओवी-2 के चपेट में आने का खतरा मंडरा रहा है।’

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