Thursday, October 1, 2020
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रिटायरमेंट से पहले चीफ सेक्रेटरी की एडजस्टमेंट का इंतजाम!

हरियाणा की खट्टर सरकार भी अपनी पूवर्वती कांग्रेस सरकार के नक्शे कदम पर चल रही है। रिटायरमेंट के बाद आईएएस-आईपीएस अफसरों की एडजस्टमेंट में सरकार पूरी दरियादिल है। 30 सितंबर को मुख्य सचिव पद से रिटायरमेंट के बाद केशनी आनंद अरोड़ा को नया कार्यभार मिल सकता है। बुधवार को सरकार ने राइट-टू-सर्विस कमीशन में चीफ कमिश्नर के पद के लिए विज्ञापन जारी कर दिया।

सीएमओ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पद पर अरोड़ा को रिटायरमेंट के बाद नियुक्त किया जा सकता है। पूर्व की हुड्डा सरकार ने विभिन्न विभागों की नागरिक सेवाओं को समयबद्ध करने के लिए यह आयोग बनाया था। विभागों में नागरिक सेवाओं को समयबद्ध किया गया और समय पर काम नहीं होने पर आयोग में सुनवाई का प्रावधान किया गया। उस समय मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए एससी चौधरी को आयोग का पहला चीफ कमिश्नर नियुक्त किया गया था।

अप्रैल-2019 में पांच वर्षों के कार्यकाल के बाद चौधरी रिटायर हो गए। तभी से यानी लगभग 16 माह से यह पद खाली था, लेकिन अब एकाएक विज्ञापन जारी हुआ है। हुड्डा सरकार में ही सेवानिवृत्त आईएएस सरबन सिंह, एडवोकेट सुनील कत्याल, डॉ़ अमर सिंह व जनरल (सेवानिवृत्त) वीके टांक को आयोग में सदस्य नियुक्त किया था। टांक के रिटायर होने के बाद खट्टर सरकार ने पहले कार्यकाल में सेवानिवृत्त आईएएस हरदीप कुमार को आयोग का सदस्य नियुक्त किया।

पिछले साल 27 जुलाई को सरबन सिंह, डॉ़ अमर सिंह व सुनील कत्याल भी रिटायर हो गए लेकिन सरकार ने आयोग के सदस्यों के पदों को भरा नहीं।

बीच में यह खबर भी आई कि सरकार ने दूसरे कई राज्यों की तर्ज पर आयोग को सिंगल मेम्बरी बनाने का फैसला लिया है लेकिन यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। सूत्रों का कहना है कि चीफ कमिश्नर पोस्ट के लिए भी एक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि इस पद पर मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने वाले अधिकारी ही लग सकेंगे।

भाजपा के कई नेताओं ही नहीं, अनेक आईएएस-आईपीएस अफसरों की नजर भी आयोग में सदस्यों के पदों पर थी। मगर सरकार ने केवल चीफ कमिश्नर पद के लिए विज्ञापन जारी किया है, सदस्यों के पद अभी खाली ही रहेंगे। ऐसे में इन पदों के लिए लॉबिंग में जुटे लोगों की मुहिम को धक्का लगा है। पार्टी वर्करों में इससे नाराजगी भी है। राइट टू सर्विस कमीशन में अब कोई काम नहीं है, लेकिन फिर भी हर साल करोड़ों रुपये का खर्चा हो रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा ‘सीएम विंडो’ शुरू किए जाने के बाद नागरिक सेवाओं में होने वाली देरी की शिकायतें सीएम विंडो पर ही आ रही हैं। आयोग में सुनवाई भी देरी से होती है और न्याय मिलने में भी लम्बा समय लगता है।

मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए डीएस ढेसी ने भी खट्टर सरकार के पहले कार्यकाल में राइट टू सर्विस कमीशन में चीफ कमिश्नर पद के लिए लॉबिंग की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी। हालांकि सरकार ने उन्हें हरियाणा राज्य बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) के चेयरमैन पद पर एडजस्ट किया। माना जा रहा है कि अब मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा को इस पद पर नियुक्ति मिल सकती है।

राइट टू सर्विस कमीशन के चीफ कमिश्नर को सरकारी गाड़ी और कोठी के अलावा स्टाफ मिलेगा। इतना ही नहीं, चीफ कमिश्नर पद से रिटायरमेंट के बाद भी लाइफ टाइम के लिए एक चपरासी मिलेगा। ठीक इसी तरह की सुविधाएं राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त को मिलती हैं। वर्तमान में सेवानिवृत्त आईपीएस यशपाल सिंघल मुख्य सूचना आयुक्त हैं।

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