Tuesday, September 22, 2020
Home NEWS नागरिक अधिकारों का प्रश्न

नागरिक अधिकारों का प्रश्न

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार उत्तर प्रदेश के चिकित्सक डॉ. कफील खान को आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिहा करने के आदेश दे दिये, जिसके बाद उन्हें मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया। लेकिन इस प्रकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली और मंशा पर सवाल खड़े कर दिये। अदालत का फैसला नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति न्यायिक प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। अदालत ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में डॉ. कफील द्वारा कथित रूप से दिये गये भड़काऊ भाषण के आरोप को सिरे से खारिज किया। कोर्ट ने उनकी नजरबंदी को अवैध करार दिया। अदालत ने माना कि भाषण में कोई ऐसा तथ्य नहीं था, जो शांति भंग करने की वजह बन सकता था। दरअसल, डाक्टर कफील के खिलाफ अलीगढ़ सिविल लाइन्स थाने में शांति भंग करने समेत अन्य कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में यूपी एसटीएफ ने उन्हें 29 जनवरी को मुंबई से गिरफ्तार किया था। बाद में अदालत ने उन्हें रिहा करने के आदेश भी दे दिये थे, लेकिन इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा दिया था। इसके बाद कफील खान के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत उनकी रिहाई की मांग की और एनएसए लगाने को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की जानी चाहिए। मगर तकनीकी कारणों से मामले में सुनवाई होने में डॉ. कफील को बारह तारीखों का इंतजार करना पड़ा। अब जब मामले में कोर्ट से फैसला काफील के पक्ष में आया है तो उन्होंने फैसले को राज्य सरकार के पक्षपातपूर्ण व्यवहार को उजागर करने वाला बताया। यहां इस मुद्दे ने नागरिक अधिकारों और सरकार के निरंकुश व्यवहार के सवाल पर बहस को आगे बढ़ाया है।

वहीं रिहाई के बाद डॉ. कफील का कहना है कि जब अदालत ने क्लीन चिट दे दी है तो मुझे सरकारी नौकरी वापस दी जाये। वह पुन: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में नौकरी करना चाहते हैं। दरअसल, इस कालेज में तीन साल पहले साठ बच्चों की मौत के बाद हुए हंगामे में डॉ. कफील निशाने पर आ गए थे। उन्होंने आक्सीजन की कमी को संस्थागत विफलता बताया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी। कफील का कहना था कि उनके राजनीतिक रुझान को लेकर मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी गई थी। वे कहते हैं कि मैं डाक्टर हूं और पेशे के माध्यम से लोगों की सेवा करना चाहता हूं। कोरोना संकट के दौर में भी वह सेवा करना चाहते हैं। इस बीच वे रामायण का उद्धरण देकर राजहठ व बालहठ का भी जिक्र करते हैं। बहरहाल, उनकी रिहाई को अब राजनीतिक मुद्दा भी बनाया जा रहा है। उनकी रिहाई के बाद समाजवादी पार्टी अपने दिग्गज नेता आजम खान की रिहाई की मांग कर रही है जो जमीन विवाद में जेल में हैं। निस्संदेह, यह विवाद भाजपा की प्रदेश सरकार के लिये मुश्किल पैदा करने वाला ही है। कोर्ट का निर्णय सामंजस्य व समावेशी राजनीति की ओर इशारा करता है। दरअसल, डॉ. कफील जो एक बाल-रोग विशेषज्ञ हैं, आरोप लगाते रहे हैं कि जब से उन्होंने बच्चों की मौत की वजह अस्पताल में आक्सीजन की कमी बतायी है तभी से वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं। राज्य सरकार को राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने के आरोप को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उसे लोगों में अपना विश्वास कायम करना चाहिए कि वह नागरिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध है। निस्संदेह भारतीय न्याय व्यवस्था भी इस बात की पक्षधर रही है कि हर हालत में न्याय होना चाहिए। किसी को गलत वजह से जेल में डालकर उसके नागरिक अधिकारों का हनन नहीं किया जाना चाहिए। इससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर भी आंच आती है और उसकी अाजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

Avatar
aakedekhhttps://aakedekh.in
Aakedekh : Live TV लाइव Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

घुसपैठ नाकाम, सीमा पर मादक पदार्थ और हथियार बरामद

बीएसएफ ने ‍जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिश नाकाम की है, साथ ही एक-एक किलोग्राम हेरोइन...

कोरोना के बाद शायद 2 करोड़ लड़कियां स्कूल नहीं लौट पाएंगी : मलाला

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई ने कहा है कि कोरोना संकट खत्म होने के बाद भी दो करोड़ लड़कियां शायद स्कूल...

मोहनलाल बने जोगिंदरा कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर

औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के मोहनलाल चंदेल को जोगिंदरा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक सोलन का निदेशक नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति पर मोहनलाल चंदेल...

फेसबुक तटस्थ, बिना किसी भेदभाव के काम कर रहा मंच

फेसबुक इंडिया के प्रमुख अजीत मोहन ने सत्तारूढ़ भाजपा सदस्यों के कथित घृणा फैलाने वाले भाषणों से निपटने के तरीके का बचाव...

Recent Comments

Open chat