Tuesday, September 29, 2020
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छात्र देना चाहते हैं जेईई, नीट परीक्षा

इंजीनियरिंग और मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाली जेईई और नीट की परीक्षा को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते हमारे लिए छात्रों की सुरक्षा और उनका करिअर महत्वपूर्ण है। इन परीक्षाओं को पहले ही दो बार स्‍थगित किया जा चुका है। अब अधिकतर विद्यार्थी और उनके अभिभावक चाहते हैं कि परीक्षा निर्धारित समय पर हो। निशंक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा था कि हम छात्रों का अकादमिक वर्ष खराब नहीं कर सकते। उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर बेवजह विरोध और राजनीति नहीं करने का आग्रह किया है।

केंद्रीय मंत्री ने बृहस्पतिवार को कहा कि 17 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने जेईई और नीट परीक्षा के लिये अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लिया है और इससे स्पष्ट होता है कि छात्र हर हाल में परीक्षा चाहते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब कोरोना के मामले बढ़ने के मद्देनजर नीट और जेईई मेन्स परीक्षा को स्थगित करने की कुछ वर्गों द्वारा मांग की जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘हमें छात्रों और अभिभावकों से परीक्षा के लिए ई मेल मिले हैं। वे इस परीक्षा की तैयारी दो-तीन वर्षों से कर रहे हैं।’ जेईई एक से 6 सितंबर के बीच होगी, जबकि नीट-स्नातक 13 सितंबर को कराने की योजना है। नीट के लिए 15.97 लाख विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। जेईई मेन्स के लिये करीब 8.58 लाख ने पंजीकरण कराया था।

गौर हो कि कल बुधवार को गैर एनडीए शासित 7 राज्यों की वर्चुअल मीटिंग में कई मुख्यमंत्रियों ने जेईई और नीट की परीक्षा स्थगित करवाने के लिए एकजुट होने के आह्वान के साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। इससे यह एक सियासी मुद्दा भी बना गया है।

देरी से ‘शून्य सत्र’ का खतरा : आईआईटी प्रमुख

कई आईआईटी संस्थानों के निदेशकों ने कहा कि नीट एवं जेईई परीक्षा में और देरी से ‘शून्य शैक्षणिक सत्र’ का खतरा है। आईआईटी रूड़की के निदेशक अजित के चतुर्वेदी ने कहा,‘हमें इस अकादमिक सत्र को ‘शून्य’ नहीं होने देना चाहिए।’ आईआईटी खडगपुर के निदेशक वीरेंद्र तिवारी के मुताबिक, ‘इन परीक्षाओं के लिए त्वरित विकल्प निश्चित रूप से प्रतिस्पर्धा के स्तर पर संतुष्ट करने वाला नहीं होगा।’ आईआईटी संयुक्त प्रवेश बोर्ड के सदस्य एवं आईआईटी रोपड़ के निदेशक सरित कुमार दास ने कहा कि ‘शून्य अकादमिक सत्र’ विद्यार्थियों और संस्थानों दोनों के लिए खराब होगा।

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