Wednesday, September 23, 2020
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एनजीटी का निर्देश, ध्वनि प्रदूषण नियमों को लागू कराए दिल्ली सरकार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जमीनी स्तर पर ध्वनि प्रदूषण के नियम लागू हों। इनकी अनुपालना के लिए उसने एक समिति का गठन भी किया है। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने नियमों को लागू करने में नाकाम रहने पर दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज एसपी गर्ग की अगुवाई में एक निगरानी समिति गठित की, जो अनुपालन की स्थिति का पता लगाएंगे। 

पीठ ने कहा कि समिति  ई-मेल द्वारा अगली तारीख से पहले अपनी रिपोर्ट दे सकती है। इसके लए वह किसी विशेषज्ञ/संस्थान की सहायता ले सकती है और ऐसे सार्वजनिक/शैक्षणिक संस्थानों/ सामाजिक संगठनों के सदस्यों को संबद्ध कर सकती है जो उपयोगी हो सकते हैं। पीठ ने कहा, हमारा मानना है कि सीपीसीबी ने जो मुआवजे का पैमाना निर्धारित किया है, उसे देश भर में लागू किया सकता है। सीपीसीबी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुपालन के लिए उपयुक्त कानूनी आदेश जारी कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल 2021 को होगी।
अधिकरण ने कहा कि, ऐसा बताया गया है कि कुछ नियामक ढांचा को लागू किया गया है लेकिन उसकी निगरानी के लिए कोई प्रभावी केंद्रीकृत तंत्र नहीं है। इसमें कहा गया कि मुख्य सचिव (एसडीएम)और पुलिस आयुक्त के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से साप्ताहिक आधार पर स्थिति का जायजा लेने की जरूरत है। 
पीठ ने कहा, दिल्ली पुलिस में डीसीपी और दिल्ली सरकार में एसडीएम रैंक के उपयुक्त अधिकारी को सौंपी गई जिम्मेदारी को निभाने के लिये मुक्त किये जाने की जरूरत है। इस बारे में पहले ही निर्देश दिए जा चुक हैं। एनजीटी ने कहा कि हालांकि अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए डीसीपी और एसडीएम को नामित किया गया था, उन्हें तलब किए जाने पर वे क्रियाशील नहीं मिले। इस स्थिति को क्रमश: पुलिस आयुक्त और मुख्य सचिव द्वारा तत्काल सही कराया जाना चाहिए। 

वे यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनके प्रतिनिधि विधिवत और संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं और साप्ताहिक बैठकें करते हैं और वेबसाइट पर इसकी जानकारी देते रहें। अधिकारियों को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और नगर निगमों सहित अन्य सभी नियामक निकायों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। पीठ ने कहा, ध्वनि निगरानी उपकरणों पर एकत्र किए गए पूरे डाटा को केंद्रीकृत किया जा सकता है और उनकी विशेष वेबसाइटों पर डाला जा सकता है। 

अगर प्रदूषण मानकों की अनुपालना कराने में मॉडल बनता है तो सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को ऐसा करने  में मदद मिलेगी। अधिकरण हरदीप सिंह और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजौरी गार्डन इलाके में बार और रेस्तरां शादियों, रिसेप्शन, पार्टियों और अन्य कार्यक्त्रस्मों के दौरान लाउड स्पीकर और डीजे सिस्टम का उपयोग करके रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं। एनजीटी ने पहले सीपीसीबी को देश भर में इस समस्या को हल करने के लिए ध्वनि प्रदूषण मानचित्र और सुधारात्मक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था।

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