Sunday, September 27, 2020
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बाल कविताएं

रिमझिम ऐसी पड़ी फुहार

धरती पर आ गई बहार।

बादल रिमझिम खूब बरसते

झूम -झूम के पौधे हंसते

मानो झुक- झुक करें नमस्ते।

बांट रहीं बूंदें धरती को

हरियाली के नव उपहार।

बच्चे खेल रहे छपछैया

तैराते कागज़ की नैया

भरे लबालब ताल तलैया।

टर्र- टर्र फिर राग अलापे

मेंढक चाचा का परिवार ।

लुभा रहे जामुन के गुच्छे

आम रसीले लगते अच्छे

झूम झूम कर खाते बच्चे।

भीगभाग जब आते हैं घर

तो भुट्टे करते सत्कार।

बूंदों के संग चलें हवाएं

और खिड़कियां भी खुल जाएं

खूब फुहारें अंदर आएं

गालों को ऐसे सहलाएं

ज्यों मां की मीठी पुचकार।

फहीम अहमद

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