Tuesday, September 22, 2020
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माँ

बदल गया रे ज़माना, बदले अम्बर और धरती।माँ आज भी है रोवे ,माँ तब भी रोया करती।

माँ के पेट में बेटा, जब लात था मारा करता,
कभी ताप में पड़ा बालक, रात ने टसकया करता,
आंसू माँ के आया करते , जब रोटी ना खाया करता।
थोड़ी सी चोट लगी छोरे के, दर्द में वो थी तडपती,
बदल गया रे ज़माना, बदले अम्बर और धरती।माँ आज भी रोवे से,माँ तब भी रोया करती।

दो टूक को तरसे आज,जो सबका पोया करती,
मेरा लाल ना रहजा भूखा, खुद भुखी सोया करती,
एक घर में पाले चार, चार घरां में ना एक भी कोना।
कहे आकाश रोहिल्ला, क्यों तेरी किस्मत में रोना।
बदल गया रे ज़माना, बदले अम्बर और धरती।
माँ आज भी है रोवे ,माँ तब भी रोया करती।

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