Friday, September 25, 2020
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घर में पूजा स्थान दिशा पर भी दें ध्यान

कोरोना, कर्फ्यू या लॉकडाउन के कारण जब सभी धार्मिक स्थल बंद हैं, तब संभवत: लोग अपने घरों में पूजा स्थान के आगे कुछ अतिरिक्त वक्त बैठ रहे होंगे। घर चाहे छोटा हो, या बड़ा, अपना हो या किराये का, लेकिन हर घर में पूजा का स्थान जरूर होता है। लेकिन, कई बार पूजा-पाठ के लिए स्थान बनवाते समय जाने-अनजाने में वास्तु संबंधी गलतियां हो जाती हैं। इन गलतियों की वजह से पूजा का फल प्राप्त नहीं हो पाता। सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए घर में मंदिर का उचित स्थान पर होना भी बहुत जरूरी है।

  • पूजा घर हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। मंदिर का पश्चिम या दक्षिण दिशा में होना अशुभ फलों का कारण बन सकता है।
  • पूजा घर के ठीक ऊपर, नीचे या आसपास शौचालय नहीं होना चाहिए। मंदिर को रसोईघर में बनाना भी वास्तु के हिसाब से उचित नहीं माना जाता।
  • सीढ़ियों के नीचे भूलकर भी मंदिर न बनवाएं।
  • बेडरूम में पूजा घर न बनाएं। यदि जगह की कमी के कारण मंदिर बेडरूम में ही बनाना पड़े तो ध्यान रखें कि वह कमरे की उत्तर पूर्व दिशा में हो और उसके चारों तरफ पर्दे लगा दें।
  • ध्यान रखें कि घर में जहां मंदिर बना हो, उस तरफ पैर करके न सोयें।
  • पूजा घर का द्वार टिन या लोहे की ग्रिल का नहीं होना चाहिए।
  • पूजा घर का रंग सफेद या हल्का क्रीम होना चाहिए। पूजा कक्ष में सौंदर्य प्रसाधन का सामान, झाड़ू व अनावश्यक सामान न रखें।
  • भगवान की मूर्तियों को एक-दूसरे से कम से कम एक इंच की दूरी पर रखें। एक ही घर में कई मंदिर न बनाएं, वरना मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • घर में दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्य-प्रतिमा, तीन देवी प्रतिमा, दो द्वारका (गोमती) चक्र और दो शालिग्राम का पूजन करने से गृहस्वामी को अशांति प्राप्त होती है।
  • भगवान की तस्वीर या मूर्ति नैऋत्य कोण में न रखें। इससे बनते कार्यों में रुकावटें आती हैं।
  • ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, गणेश, दुर्गा, कार्तिकेय की मूर्तियों का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिये। कुबेर, भैरव का मुंह दक्षिण की तरफ होना चाहिये। हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति का मुंह दक्षिण या नैऋत्य की तरफ रखना चाहिये।
  • पूजन कक्ष में किसी भी देवता की टूटी-फूटी मूर्ति या तस्वीर न रखें। भगवान का चेहरा कभी भी ढकना नहीं चाहिए, यहां तक कि फूल-माला से भी चेहरा न ढकें।
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