Sunday, September 20, 2020
Home SECTIONS DHARAM शांति रसायन बनाने का विज्ञान योग

शांति रसायन बनाने का विज्ञान योग

हम सभी को अपने जीवन में शांति चाहिये। आप शांति से रहना चाहते हैं पर मन अधिकतर उत्तेजित रहता है, अतः आप मानसिक रूप से शांत नहीं रह पाते। मान लीजिये, आप शांति खो देते हैं, तो स्वाभाविक है कि आप सबसे पहले अपनी पत्नी या पति से झगड़ा करेंगे। जैसे-जैसे ये आगे बढ़ेगा, आप पड़ोसी पर चिल्लाएंगे। यह और आगे बढ़ेगा और आप अपने उच्च अधिकारी पर चिल्लाएंगे। जिस दिन आप अपने उच्च अधिकारी पर चिल्लाते हैं, सब जान जाते हैं कि आप को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है। अपने पति, पत्नी या पड़ोसी पर चिल्लाना सामान्य माना जा सकता है, क्योंकि हर कोई ऐसा कर रहा है, पर बॉस पर चिल्लाने का अर्थ है कि अब बात काबू के बाहर हो गई है। अगर आप ऐसी परिस्थिति में हों जहां आपको डॉक्टर के पास जाना पड़े, तो वे आप को एक गोली देंगे। जब ये रासायनिक गोली आप की आंतरिक व्यवस्था में जाती है, तो आप कम से कम कुछ घंटों के लिए शांत हो जाते हैं। जब किसी विशेष रसायन की कुछ मात्रा शरीर और मन के स्तर पर आपकी व्यवस्था में प्रवेश करती है तो आपकी उग्रता चली जाती है, और आप के अंदर कुछ शांति स्थापित हो जाती है। अतः शांति, शरीर के अंदर एक प्रकार का रसायन ही है। इसी तरह, हर भावना में एक खास तरह का रसायन होता है। जो भी भावना है, उससे संबंधित एक रासायनिक प्रणाली शरीर के भीतर होती है, जो इसके साथ समायोजित होती है। अगर हम शांत हैं तो हमारे अंदर के रसायन भी शांत होते हैं, अथवा, यदि हम अपने अंदर उस तरह की रासायनिक प्रणाली बना सकें तो भी शांति आ सकती है। योग में हम इसे दोनों तरीकों से देखते हैं।
सही प्रकार की साधना से हम अपने आंतरिक रसायनों में परिवर्तन ला सकते हैं, जिससे, किसी भी परिस्थिति में हम शांत रह सकें। अभी तो स्थिति ये है कि आपकी शांति बाहरी परिस्थितियों की गुलाम है। अगर परिस्थिति अनुकूल है तो आप शांत होते हैं। यदि ये अनुकूल नहीं है तो फिर समस्या हो जाती है। लेकिन जब आपकी शांति बाहरी परिस्थिति की गुलाम न हो, और बाहरी परिस्थिति कैसी भी हो पर आप अपने अंदर शांत रहें, तो हम इसे योग कहते हैं। दूसरे शब्दों में आप कह सकते हैं कि योग सही तरह का रसायन बनाने का विज्ञान है।
अगर आपके पास सही तरह का रसायन है तो आप शांतिपूर्ण और आनंदमय ही होंगे। यही एकमात्र तरीका है, अन्य किसी ढंग से ऐसा हो ही नहीं सकता। शांतिपूर्ण एवं आनंदित होना जीवन का अंत नहीं है, यह जीवन की शुरुआत है। अगर आप शांत नहीं हैं, अपनी मानसिक बकवास में फंसे हुए हैं, तो अभी तक जीना शुरू नहीं किया है। शांतिपूर्ण एवं आनंदित रहना जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत है। यहां तक कि, अगर आप नाश्ते या रात के खाने का आनंद लेना चाहते हैं तो भी आपको शांतिपूर्ण होना चाहिये। उत्तेजित अवस्था में क्या आप भोजन का आनंद ले सकेंगे? नहीं! शांतिपूर्ण होना बहुत ही मूल, प्रारंभिक बात है। लेकिन आज लोग ऐसा प्रचार कर रहे हैं कि हमारे जीवन का सर्वोच्च आयाम मानसिक शांति है।
दुर्भाग्यवश, चूंकि दुनिया में अधिकांश लोग इस मूल चीज को प्राप्त नहीं कर पाये हैं, वे इसे जीवन के अंतिम लक्ष्य के रूप में प्रचारित करते हैं। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग जो अपने आप को आध्यात्मिक बोलते हैं, वे भी लोगों को यही बताते हैं कि शांतिपूर्ण होना ही परम है। वास्तव में शांतिपूर्ण होना तो बुनियादी बात है।

Avatar
aakedekhhttps://aakedekh.in
Aakedekh : Live TV लाइव Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

नयी शिक्षा नीति का मकसद उत्कृष्टता : कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि नयी शिक्षा नीति का मकसद समावेशी और उत्कृष्टता के दोहरे उद्देश्य को हासिल करके...

पार्टी में गोलीबारी : 2 की मौत, 14 घायल

न्यूयॉर्क के रोचेस्टर में शनिवार की सुबह एक पार्टी में हुई गोलीबारी की घटना में 2 लोगों की मौत हो गई जबकि...

हिमाचल में कल से खुल जाएंगे स्कूल

हिमाचल प्रदेश में आगामी सोमवार से स्कूल खुल जाएंगे। मंत्रिमंडल के फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल खोलने के बारे में...

सितंबर में सितारों की बदली चाल इस हफ्ते राहु-केतु बदलेंगे घर

इस महीने कुछ मुख्य ग्रह अपना स्थान व चाल बदल चुके हैं और कुछ बदलने वाले हैं।  गत 16 सितंबर को सूर्य...

Recent Comments

Open chat