Sunday, September 27, 2020
Home NEWS NATIONAL चीन इस हार को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। राजनाथ सिंह

चीन इस हार को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। राजनाथ सिंह

भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले स्थानों से पीछे हटने पर फिर राजी हो गयी हैं। दोनों देशों के शीर्ष सैन्य कमांडरों के बीच सोमवार को हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। सैन्य सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय पक्ष नें 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीनी पक्ष ने तिब्बत सैन्य जिला कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन की अगुवाई में करीब 11 घंटे तक बातचीत की। सूत्रों ने बताया कि यह बातचीत, ‘सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और रचनात्मक माहौल’ में हुई और यह निर्णय लिया गया कि दोनों पक्ष पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी स्थानों से हटने के तौर तरीकों को अमल में लाएंगे।
गलवान घाटी में 15 जून को चीन की सेना के साथ झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद चरम पर पहुंचे तनाव के बीच यह वार्ता हुई। घटनाक्रम से जुड़े लोगों ने बताया कि वार्ता में भारतीय पक्ष ने गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों पर ‘पूर्व नियोजित’ हमले का मामला प्रमुखता से उठाया और पूर्वी लद्दाख के सभी इलाकों से तत्काल चीनी सैनिकों को हटाने की मांग की। भारतीय पक्ष ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों को अपने बेस पर सैनिकों की संख्या घटाने का भी सुझाव दिया। सूत्रों ने बताया कि पीछे हटने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए अगले कुछ हफ्ते में दोनों पक्ष कुछ और बैठकें करेंगे।
इस बीच, बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि स्थिति सहज बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने और लंबित मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच ‘स्पष्ट और गहराई’ से बातचीत हुई।
पहले भी बनी थी सहमति : लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की पहली वार्ता 6 जून को हुई थी, जिसमें दोनों पक्ष गलवान घाटी में टकराव वाले सभी स्थानों से धीरे-धीरे पीछे हटने पर सहमत हुए थे। लेकिन 15 जून को गलवान घाटी में झड़प के बाद स्थिति बिगड़ती चली गयी और दोनों पक्ष 3500 किलोमीटर की सीमा के अधिकतर क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने लगे। सरकार ने रविवार को एलएसी पर चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सेना को ‘पूरी छूट’ दी थी। सेना ने बीते एक हफ्ते में हजारों अतिरिक्त जवानों को भेजा है। वायुसेना ने भी श्रीनगर और लेह समेत अपने कई अहम ठिकानों पर सुखोई 30 एमकेआई, जगुआर, मिराज 2000 लड़ाकू विमानों के साथ ही अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की तैनाती की है।

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